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21.10.2026 05:05 AM
AUD/USD: मूल्य विश्लेषण और पूर्वानुमान — अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समझौते से AUD/USD में तेजी आ सकती है।

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मंगलवार को AUD/USD ने एक नया मासिक उच्च स्तर छू लिया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति की नई उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट और AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के अत्यधिक ऊँचे मूल्यांकन को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी अमेरिकी डॉलर पर अतिरिक्त दबाव डाला।

इज़राइल के चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने ईरान के अधिकारियों के सामने समझौते की एक योजना पेश की, जिसे वॉशिंगटन और तेहरान दोनों से प्रारंभिक समर्थन मिला। इस योजना का उद्देश्य सैन्य तनाव को और बढ़ने से रोकना तथा दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लाना है। इन खबरों से वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं को समर्थन मिला।

पिछले सप्ताह कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुँचने के बाद अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की चाल को मापता है, मंगलवार को लगभग 0.28% गिरकर 101.70 के आसपास आ गया। इससे एक सप्ताह पहले यह लगभग 103 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो अप्रैल 2025 के बाद का इसका उच्चतम स्तर था।

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हाल के दिनों में डॉलर तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी निवेशकों की धारणा में बदलाव के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो गया है। कई महीनों तक अमेरिकी AI शेयरों में विदेशी पूँजी के बड़े प्रवाह ने डॉलर की मांग को समर्थन दिया। लेकिन अब टेक्नोलॉजी सेक्टर में आई गिरावट और AI को लेकर उत्साह कम होने से अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण घटा है, जिससे डॉलर पर दबाव और बढ़ गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट भी डॉलर को मिलने वाले समर्थन को सीमित कर रही है। 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड महीने की शुरुआत में 5.36% थी, जो घटकर लगभग 5.08% रह गई है। इससे डॉलर में निवेश करने का यील्ड संबंधी लाभ कम हुआ है और AUD/USD के लिए अधिक अनुकूल माहौल बना है।

हालाँकि, अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त अभी भी सीमित है। इसका एक कारण पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) का प्रमुख ऋण दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला है। मंगलवार को एक-वर्षीय LPR दर 3.00% और पाँच-वर्षीय LPR दर 3.50% पर बनी रही, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था।

PBoC का यह फैसला चीन की आर्थिक संभावनाओं को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सतर्क रुख को दर्शाता है। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके कच्चे माल का प्रमुख खरीदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिति का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

डॉलर में गिरावट को सीमित करने वाला एक अन्य कारक महँगे तेल के कारण बढ़ता महँगाई जोखिम है। मंगलवार को WTI कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता रहा, जो एक नया मासिक उच्च स्तर है। सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर हूती विद्रोहियों के हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं ने तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएँ बढ़ा दी हैं।

ऊर्जा की ऊँची लागत अमेरिका में महँगाई के दबाव को फिर से बढ़ा सकती है। इसके चलते फेडरल रिजर्व मौद्रिक नीति को लंबे समय तक सख्त बनाए रख सकता है या साल के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है।

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मंगलवार को प्रकाशित रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 100 में से 94 अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि सितंबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद फेडरल रिजर्व 27–28 अक्टूबर की बैठक में दरों को 3.75–4.00% पर स्थिर रखेगा। वहीं, सर्वेक्षण में शामिल सभी अर्थशास्त्रियों को दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

ऐसी स्थिति में डॉलर में आगे की कमजोरी सीमित हो सकती है और AUD/USD की बढ़त पर भी अंकुश लग सकता है। निकट भविष्य में इस करेंसी पेयर की दिशा मध्य पूर्व के घटनाक्रम, तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड और फेड की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार के आकलन पर निर्भर करेगी।

तकनीकी विश्लेषण: हालाँकि AUD/USD ने 0.700 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर कारोबार किया, लेकिन अभी तक इस स्तर के ऊपर लगातार टिकने वाली क्लोजिंग दर्ज नहीं की है। दैनिक चार्ट पर ऑसिलेटर नकारात्मक संकेत दे रहे हैं, जो मंदड़ियों (बेचने वालों) की बढ़त दर्शाते हैं।

कई मूविंग एवरेज के एक-दूसरे के करीब आने से कीमत को समर्थन मिल रहा है, जिससे एक मजबूत आधार बनता है। फिर भी, जब तक यह करेंसी पेयर 0.700 के ऊपर क्लोजिंग नहीं देता और 200-दिवसीय SMA को पार नहीं करता, तब तक बाजार पर मंदड़ियों का दबदबा बने रहने की संभावना है।

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